प्रेसीडेण्ट इन काउन्सिल

 मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिन्यम मई 1961 नगर पालिका के नीति निर्धारण और उसके / परिपालन क्रियान्वयन मे लोक प्रतिनिधित्व देने केसंबंध मे व्यवस्था प्रविस्ठिया है, जिस के अन्तर्गत नागरिको द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियो तथा सामान्य नागरिको को परामर्श प्राप्त होता है ।

  1. नगर पालिका परिषद द्वारा निर्धारित की जाने वाली नीति और कार्य व उनका क्रियान्व्यन प्रतिनिधि के बहुमत से किय जाता है ।
  2. नगर पालिका अधिन्यम की धारा ७० के अन्तर्गत मेयर-इन-काउंसिल के गठन का प्रावधान है ।

 

क्रत्य

1)  ५०,००० या उससे अधिक जनसन्ख्या की दशा मे १५०००/- से अधिक किन्तु २ लाख तक के व्यय की स्वीक्रति एवम ५०००० से कम जनसन्ख्या की दशा मे १०,०००/- से अधिक किन्तु १ लाख तक के व्यय की स्वीक्रति ।

 

2)  अधिन्यम की धारा  93 (1), 94 (1), (2), 121 (1), 126, 160, 168, 168 (7), 228, 235, 237, 238, 249, 253 (1) (3), 255 (1), 261, 262 (1) (3), 263, 265, 267, 272, 273, 274 & 281 द्वारा परिषद मे विशिस्ठ शक्तियो क प्रयोग |

3)  मुख्य नगर पालिका अधिकारी के क्षेत्राधिकार के ऊपर के प्रकरणो सम्बन्धित विभाग के प्रभारी सदस्य को निर्णय हेतु प्रस्तुत किया जाये ।

4)  अधिन्यम की धारा  57 (1) , 61, 62, 71 (1), 138, 142 (1), 176 & 189 A के अन्तर्गत  परिषद मे विशिस्ठ शक्तियो क प्रयोग |

5)  कार्य एवम दायित्व - उपरोक्त पेरा मे वर्णित प्रावधानो के अन्तर्गत कार्यो का सम्पादन |

6)  प्रेसीडेण्ट-ईन-काउन्सिल की बेठक की कार्यवाही कार्यव्रत पुस्तिका मे लेखबध्द की जावेगी व नागरिको को उसके निरीक्षण क नियमानुसार अधिकार है ।

 

c.   अधिन्यम की धारा ७१ के अन्तर्गत निर्वाचित प्रतिनिधियो की सलाह्कार समितियो के माध्यम से विभाग से सम्बन्धित प्रकरणो व नीतियो पर सलाह प्राप्त की जाती है ।

d.    अधिनियम की धारा ७२ के अन्तर्गत परिषद आवश्यकतानुसार अधिनियम के प्रायोजनो से सम्बन्धित किसी भी प्रकरण मे जान्च व प्रतिवेदन हेतु प्रतिनिधियो परामर्शदात्री समिति गठित करने का प्रावधान है |

e.   अधिनियम की धारा ७२ के अन्तर्गत नागरिको की वार्ड समिति का गठन कर उनका परामर्श नीति निर्धारण व कार्य सम्पादन मे सुनिश्चित किये जाने की भी व्यवस्था है ।

f.    अधिनियम की धारा १२२ के अन्तर्गत परिषद लेखाओ का अन्केक्षण करवाने की व्यवस्था करने के लिये अधिक्रत है |

अधिनियम की धारा ३२५ के अन्तर्गत शसन के निर्देशो के अनुसार किसी भी विषय मे आम नागरिको की राय प्राप्त करना परिषद के लिये बन्धन्कारी है ।